एक मुलाकात, एक जज़्बा (भाग 1) – जब Washroom में शुरू हुई एक ऐतिहासिक मुलाकात
स्थान: एयर हेडक्वार्टर, नई दिल्ली | वर्ष: 2006
कभी-कभी सबसे गहरी कहानियाँ वहीं से शुरू होती हैं जहाँ हम सोचते भी नहीं – इस कहानी की शुरुआत एक washroom से हुई। जी हाँ, एयरफोर्स मुख्यालय में, जहाँ हर रोज़ ड्यूटी की गहमागहमी चलती थी, वहीं MWO JS Lathar की निगाहें रोज़ टकराया करती थीं Air Marshal Athawale से।
वो जनरल washroom में भी General नहीं, एक साधारण, विनम्र इंसान की तरह आते थे। उनका न कोई सिक्योरिटी घेरे का घमंड, न कोई रौब। JSL साहब सोचते रहते – “इतना बड़ा आदमी, फिर भी इतना डाउन टू अर्थ?”
पहला संवाद – और कॉफी के साथ आत्मा की बात
MWO Lathar ने एक दिन हिम्मत करके कह ही दिया –
“Sir, एक बात कहनी है आपसे।”
जनरल मुस्कराए और बोले – “आओ, ऑफिस में बात करते हैं।”
पहली बार बुलावा मिला – और वो मुलाकात सिर्फ कॉफी पीने की नहीं थी, दो आत्माओं की शुरुआत थी। JSL साहब बोले –
“Sir, आप इतने सीनियर होकर भी General Washroom में आते हैं। इतने Simple!”
Athawale साहब ने कहा – “अरे भाई, मैं भी जवान ही था एक ज़माने में।”
जब पहली बार इंसान ने इंसान को पहचाना
वह सिर्फ ड्यूटी की बातचीत नहीं थी। वह थी एक ऐसी पहचान की शुरुआत, जहाँ न कोई पद बड़ा था, न कोई छोटा।
“Blue Uniform की आत्मा” की बात शुरू हुई।
“Sir, एक जवान के लिए आप जैसे अफसर rare हैं” – JSL साहब ने कहा।
और वहीं से हर हफ्ते की मुलाकातें शुरू हुईं, चाय-कॉफी से लेकर आत्मिक विचारों तक। जैसे दो ग्रह एक ही राशि में चले आए हों – एक अनुभवी सूर्य, एक तपता चंद्र।
अगला भाग जल्द आ रहा है: “जब जवान ने जनरल से असहमति जताई”
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